Monday, 13 February 2017

शेयर बाजार से संबंधित कुछ महत्वपूर्ण जानकारी

निर्गमित पूंजी (Issued Capital ):- बाजार में कम्पनी  द्धारा जितने मूल्य के शेयर विक्रय के लिये जारी किये जाते हैं उसे निर्गमित पूंजी कहते हैं ।
आवेदित पूंजी (Subscribed Capital ):- बाजार में निवेशकों द्धारा जितने मूल्य के शेयर ख़रीदे  जाते हैं उसे आवेदित पूंजी कहते हैं ।  
यदि आवेदित पूंजी का मूल्य निर्गत पूंजी से कम है, इस स्थिति को अल्प आवेदन कहते हैं। अल्प आवेदन के कारण बाजार में शेयर का मूल्य कम होने लगता है वही यदि आवेदित पूंजी का मूल्य निर्गत पूंजी से अधिक है तो इस स्थिति को अति आवेदन कहते हैं । अति आवेदन के कारण बाजार में शेयर मूल्य बढ़ने लगता है यदि आवेदित पूंजी का मूल्य निर्गत पूंजी के बराबर है तो इस स्थिति को पूर्ण आवेदन की स्थिति कहते हैं पूर्ण आवेदन के कारण बाजार में शेयर का मूल्य स्थिर रहता है । 
बटटा (Discount ) एवं प्रीमियम (Premium ):- अंकित मूल्य की तुलना में शेयर के बाजार मूल्य के अभाव को बटटा कहते है। अंकित मूल्य की तुलना में शेयर के बाजार के आधिक्य को प्रीमियम कहते हैं । यदि अंकित मूल्य और बाजार मूल्य बराबर हो तो उसे मूल्यों में समानता या शेयर एट पार (share at par ) कहते हैं ।

 शेयर मूल्य  सूचकांक (Share Price Index )                        शेयर बाजार (Stock Exchange)               
Dow Jones     न्यूयॉर्क 
Nikkei    टोक्यो 
MDAX    जर्मनी 
Hang Seng     हांगकांग 
SGX     सिंगापूर  
KOSPI     कोरिया 
SET      थाईलैंड  
TAIEX    ताइवान 
NASDAQ     स.रा. अमेरिका  
SLP    कनाडा  
Bovespa    ब्राजील   
MIBTel    इटली  
MEXBOL(IPC)   मैक्सिको   

Thursday, 9 February 2017

हरित इमारतें(Green Building) और भारत का इसमें स्थान

ऐसी इमारत जिसके डिजाइन से लेकर निर्माण और रख-रखाव तक में पर्यावरण का विशेष ध्यान रखा जाता है उसे हरित इमारत कहा जाता है । ये इमारतें बिजली पानी और अन्य संसाधनों की अधिक से अधिक बचत कर प्रदुषण की रोकथाम में मददगार होती है। इन बिल्डिंग्स को ग्रीन कंस्ट्रक्शन या सस्टेनेबल बिल्डिंग्स के नाम से भी जाना जाता है । अतः राष्ट्रीय ऊर्जा एजेंसी के अनुसार आज दुनिया में बिजली की 40 प्रतिशत खपत और कार्बन डाई ऑक्साइड के 24 प्रतिशत उत्सर्जन के लिए पंरपरागत इमारतें जिम्मेदार हैं 
भारत में हरित इमारतों की शुरुआत 2003 में हैदराबाद के सीआईआई-सोहराबजी गोदरेज ग्रीन बिजनेस सेंटर के निर्माण के साथ हुई थी इसके बाद देश में ग्रीन हरित इमारतें बनाने का सिलसिला धीरे-धीरे चल निकला। 
इसी का परिणाम है जो आज देश में लगभग 1 करोड़ 60 लाख वर्ग मीटर का हरित इमारत क्षेत्र मौजूद है अथवा इस पर काम चल रहा है । 
   
हरित इमारतों के मामले में चीन और कनाडा के बाद भारत तीसरे का स्थान है। अमेरिका की ग्रीन बिल्डिंग काउंसिल की एक रिपोर्ट में अमेरिका को छोड़कर अन्य देशों को रेखांकित किया गया है जहाँ टिकाऊ इमारतों के डिजाइन के क्षेत्र में उल्लेखनीय तरक्की हुई है ।  

गुरुत्वाकर्ष का नया सिद्धांत

         आइस्टीन के गुरुत्वाकर्ष सिद्धांत का विकल्प माना  गया नया सिद्धांत पहले परिक्षण में सफल हो गया है । 33 हजार से ज्यादा आकाशगंगाओं के अध्ययन में नए सिद्धांत को खरा पाया गया है। यह सिद्धांत केवल द्रव्यमान के आधार पर गुरुत्वाकर्षण का अनुमान लगाता है। 
नीदरलैंड्स की लीडन औब्जर्वेटरी में अंतरिक्षविद ,मार्गट ब्रावर की अगुवाई वाली टीम ने इस सिद्धांत का परिक्षण किया । 
यह सिद्धांत नीदरलैंड्स की यूनिवर्सिटी ऑफ़ एम्सटर्डम के भौतिकविद एरिक वर्लिङे  ने दिया है, 
 वैज्ञानिको ने बताया कि गैलेक्सियों का गुरुत्वाकर्षणअपने निकट से गुजरने वाले प्रकाश को मोड़ देता है यह प्रभाव वैसे ही काम करता है जैसे किसी लेंस से गुजरते हुए प्रकाश मुड़ जाता है । इस प्रभाव के कारण आगे वाली आकाशगंगा अपने से पीछे वाली आकाशगंगा के लिए लेंस का काम करती है इस स्थिति में पीछे वाली आकाशगंगा अपनी जगह से कुछ हटकर दिखाई देती है । 

Wednesday, 8 February 2017

अंतरिक्ष में कचरा 

जापान की अंतरिक्ष एजेंसी जाक्सा (JAXA) ने अंतरिक्ष से कचरा ले आने के लिए एक अंतरिक्ष यान लॉन्च किया है, जोकि पृथ्वी के चारो ओर  उसकी कक्षा में मौजूद पुराने उपग्रहों से निकले कचरे को लाने का काम करेगा ।
यह प्रयोग अंतर्राष्ट्रीय सफाई मिशन का एक अहम हिस्सा है, जिसका उद्देश्य अंतरिक्ष यात्रियों की सुरक्षा और लगभग 6,74 लाख करोड़ रुपए के अंतरिक्ष स्टेशनों का बचाव करना है । 

कचरा इक्कठा करने वाले जापान ऐरोस्पेस एक्सप्लोरेशन एजेंसी के यान में पतले स्टेनलेस स्टील और एल्युमीनियम तारों का जाल है । इस जाल की पट्टी का एक छोर इसके चारों तरफ घूमते कचरे के संपर्क में  रहता है । पृथ्वी के चुम्बकीय क्षेत्र से होकर गुजरने वाले जाल द्वारा विजली पैदा होती है जिसके कारण अंतरिक्ष के कचरे की गति धीमी हो जाती है और वह जाल की तरफ खिंचा चला आता है । 

मानव के 50 वर्षो के अंतरिक्ष इतिहास में  धरती की सतह के चारो ओर घूमने वाले कचरे की एक खतरनाक पट्टी बन गई है इस कचरे का छोटा सा हिस्सा भी अगर किसी भी संचार नेटवर्क से टकरा कर उसे नुकसान पहुँचा सकता हैं ।  

Tuesday, 7 February 2017

क्या है ये क्यूआर कोड(QR Code ) और इसे क्यों बनाया गया।

क्यूआर कोड (QR code) तब चर्चा में आया जब जापान सरकार ने अपने उन वरिष्ठ नागरिको जो डिमेंशिया (भूलने की बीमारी ) से परेशान हैं उनके लिए विशेष क्यूआर कोड स्टीकर बनाया और उसे उनके नाखूनों पर चिपकाया जाता है ताकि ऐसे लोग यदि कभी घर का रास्ता भूल जाएँ या घर से कही चले जाएँ तो उन्हें आसानी से ढूढ़कर घर भेजा जा सके । 

QR code का पूरा नाम  Quick Response Code

ये स्कवायर बार कोड होते है , जो सबसे पहले जापान में ऑटोमोटिव उधोग के लिये विकसित तथा प्रयोग किये गए थे। 
यह कोड बहुत सारी जानकारी को संगृहीत कर सकते हैं ।  
चित्र - क्यूआर कोड
figure -QR Code 

Monday, 6 February 2017

Do provide highest Internet speed these country

  1. दक्षिण कोरिया :- 26.6  mbps  की इन्टरनेट स्पीड । 92.4 फीसद आबादी इन्टरनेट से जुडी है । 
  2. नॉर्वे :- स्पीड 20.1 mbps 98 फीसद आबादी इन्टरनेट से जुडी है । 
  3. हांगकांग :- स्पीड 20.1 mbps , यहाँ की  74.1 फीसद आबादी इन्टरनेट से जुडी है । 
  4. सिंगापूर :- स्पीड 18.2 mbps , यहाँ की  82.5 फ़ीसदी आबादी इन्टरनेट से जुडी है । 
  5. स्विट्जरलैंड :- स्पीड 18.4 mbps , यहाँ की  87.4 फ़ीसदी आबादी इन्टरनेट से जुडी है । 
  6. जापान :- स्पीड 18 mbps , यहाँ की 91.4 फ़ीसदी आबादी इन्टरनेट से जुडी है । 
  7. फिनलैंड :- स्पीड 17.3 mbps , यहाँ की  93.7 फ़ीसदी आबादी इन्टरनेट से जुडी है ।
  8. नीदरलैंड :- स्पीड 17.3 mbps , यहाँ की  93.7 फ़ीसदी आबादी इन्टरनेट से जुडी है ।
इन सब में भारत 114व  स्थान पर है औसत इन्टरनेट  स्पीड 3.5 mbps है। यहाँ सिर्फ 34.8 फीसद आबादी इन्टरनेट से जुडी है ॥  

राष्ट्रगान के महत्व तथ्य( Facts national anthem importance)


  • पहली बार राष्ट्रीय गान जन -गण -मन  16  दिसम्बर 1911 को कांग्रेस  के कलकत्ता अधिवेशन में गाया गया था । 
  • 30 दिसम्बर 1911 को ब्रिटिश सम्राट जॉर्ज पंचम भारत आए और कोलकाता के कुछ अखबारों में  लिखा गया कि संभबत : यह गीत उनके सम्मान में लिखा गया हैं लेकिन 1939 में रवेन्द्र नाथ टैगोर जी ने इसका विरोध किया । 
  • पहली बार राष्ट्रीय गान की संगीतबद्ध प्रस्तुति जर्मनी के हैम्बर्ग शहर में हुई । 
  • 24 जनवरी 1950 को जन-गण-मन को राष्ट्रगान के तौर पर संविधान सभा ने मान्यता दे दी । 
  • इसके अंग्रेजी अनुवाद को संगीतबद्ध किया मशहूर कवि जेम्स कजिन की पत्नी मारग्रेट ने जो बेसेंट थियोसोफिकल कॉलेज की प्रधानाचार्य थी । 
  • नेताजी सुभाष चंद्र बोस ने इसका संस्कृतनिष्ठ बांग्ला से हिंदी में अनुवाद करवाया था, अनुवाद आबिद अली ने किया और इसे संगीबद्ध किया कैप्टन राम ठाकुर ने। 
  • राष्ट्रगान की शुरूआती दौर से नाम था 'सुबह सुख चैन '